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‘केबीसी 13’ के मंच पर ‘गोल्डन बॉय’ नीरज चोपड़ा बने पुलिस

‘केबीसी 13’ के मंच पर ‘गोल्डन बॉय’ नीरज चोपड़ा बने पुलिस

‘कौन बनेगा करोड़पति 13’ (KBC 13) ‘फैंटास्टिक फ्राइडे’ के इस एपिसोड में ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा और भारतीय हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश मौजूद रहेंगे.

मुंबई : इस समय ‘कौन बनेगा करोड़पति 13‘ (केबीसी 13) ‘फैंटास्टिक फ्राइडे‘ में ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा और भारतीय हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश मौजूद रहेंगे। केबीसी 13 के इस खास एपिसोड में नीरज चोपड़ा शो के होस्ट अमिताभ बच्चन को शो पढ़ाते नजर आएंगे। इस एपिसोड के कई प्रोमो सामने आ चुके हैं, जो वायरल हो चुके हैं. प्रोमो में नीरज चोपड़ा और पीआर श्रीजेश अपने संघर्ष की कहानी बताते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा वे अमिताभ बच्चन के सवालों का भी जवाब दे रहे हैं।

एक प्रोमो में नीरज ने अमिताभ बच्चन को हरियाणवी में अपनी फिल्म ‘जंजीर’ के डायलॉग्स सिखाए। इस डायलॉग को सिखाते हुए नीरज ने कहा, ‘ये थारे बाप का घर कोनी, थाना है, सिद्ध खड़ा रहा..’ अमिताभ बच्चन ने भी इसे दोहराया और इस डायलॉग को हरियाणवी अंदाज में पेश किया. नीरज और श्रीजेश जब शो में पहुंचे तो केबीसी का मंच ‘वंदे मातरम‘ की घोषणाओं से गुलजार था.

इसके अलावा नीरज ने हरियाणवी में फिल्म ‘दीवार’ के मशहूर डायलॉग्स के हरियाणवी अंदाज में भी बात की है, ‘मैं अब भी फेंका हुआ पैसा नहीं फेंकता’ और ‘मैं और मेरा अकेलापन अक्सर करते हैं ये काम फिल्म ‘सिलसिला’ में। नीरज के हर डायलॉग पर खूब तालियां बजती थीं.

कौन बनेगा करोड़पति 13

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ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ओलंपिक इतिहास में भाला फेंक में पदक जीतने वाले पहले भारतीय हैं। 23 वर्षीय नीरज टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय हैं। यह भाला फेंकने वाला निशानेबाज अभिनव बिंद्रा के बाद देश के लिए दूसरा स्वर्ण पदक हासिल करने में सफल रहा है। इससे पहले केवल अभिनव बिंद्रा ने 2008 के ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था।

दूसरी ओर, भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने भी ओलंपिक में बड़ी सफलता हासिल की। टीम ने 1980 के बाद पहली बार ओलंपिक में पदक जीता। भारतीय टीम कांस्य पदक जीतने में सफल रही। टीम की सफलता में गोलकीपर पीआर श्रीजेश का अहम योगदान रहा।

संघर्ष की कहानी

इस मंच पर अमिताभ बच्चन उन दोनों से पूछने वाले हैं, ‘क्या आपको अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी?’ श्रीजेश कहते हैं, ”2012 में हमने एक भी मैच नहीं जीता और जब हम भारत लौटे तो सब हम पर हंस रहे थे.” वहीं, नीरज ने कहा, ‘जब मैं पहली बार स्टेडियम गया था, वहां 30-40 मीटर थ्रो था, 40 से 80 मीटर तक पहुंचने के लिए मुझे 10 साल तक कड़ी मेहनत करनी पड़ी।’

उनके संघर्ष की कहानी सुनने के बाद, ‘बिग बी‘ ने कहा कि जब भी कड़ी मेहनत और समर्पण की मिसाल दी जाती है, तो श्रीजेश और नीरज का नाम सबसे पहले आता है।

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